आरएसएस की असली जन्म कुंडली पार्ट-- 3

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यही विचार धारा है जिसके अधीन (गोलवरकर संघ के सबसे पूजनीय सरसंघचालक थे) ने 1961 में राष्ट्रीय एकता परिषद् के प्रथम अधिवेशन को भेजे अपने सन्देश में भारत में संघीय ढाँचे (फेडरल स्ट्रक्चर) को समाप्त कर एकात्म शासन प्रणाली को लागू करने का आह्वान किया था। संघ मज़दूरों पर पूर्ण तानाशाही की विचारधारा में यक़ीन रखता है और हर प्रकार के मज़दूर असन्तोष के प्रति उसका नज़रिया दमन का होता है। यह अनायास नहीं है कि इटली और जर्मनी की ही तरह नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में मज़दूरों पर नंगे किस्म की तानाशाही लागू कर रखी है। अभी हड़ताल करने पर कानूनी प्रतिबन्ध तो नहीं है, लेकिन अनौपचारिक तौर पर प्रतिबन्ध जैसी ही स्थिति है; श्रम विभाग को लगभग समाप्त कर दिया गया है, और मोदी खुद बोलता है कि गुजरात में उसे श्रम विभाग की आवश्यकता नहीं है! ज़ाहिर है-मज़दूरों के लिए लाठियों-बन्दूकों से लैस पुलिस और सशस्त्र बल तो हैं ही! जर्मनी और इटली में भी इन्होंने पूँजीपति वर्ग की तानाशाही को सबसे बर्बर और नग्न रूप में लागू किया था और यहाँ भी उनकी तैयारी ऐसी ही है। जर्मनी और इटली की ही तरह औरतों को अनुशासित करके रखने, उनकी हर प्रकार की स्वतन्त्रता को समाप्त कर उन्हें चूल्हे-चौखट और बच्चों को पैदा करने और पालने-पोसने तक सीमित कर देने के लिए संघ के अनुषंगी संगठन तब भी तत्पर रहते हैं, जब भाजपा शासन में नहीं होती। श्रीराम सेने, बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद् के गुण्डे लड़कियों के प्रेम करने, अपना जीवन साथी अपनी इच्छा से चुनने, यहाँ तक कि जींस पहनने और मोबाइल इस्तेमाल करने तक पर पाबन्दी लगाने की बात करते हैं। यह बात अलग है कि यही सलाह वे कभी सुषमा स्वराज, वसुन्धरा राजे, उमा भारती, या मीनाक्षी लेखी को नहीं देते जो कि औरतों को गुलाम बनाकर रखने के मिशन में उनके साथ खड़ी औरतें हैं! गोलवलकर ने स्वयं औरतों के बारे में ऐसे विचार व्यक्त किये हैं। continue..... next. part..
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