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#मुसलमानो_की_शादी
दोस्तो वादा करो पूरा पढोगे मे यकीन के साथ कह सकता हूँ आपकी नजर शर्म से झुक जायेगे |
मुसलमानो की शादियों में बजने वाले टॉप 10 गाने…
1. झूम बराबर झूम शराबी
2. दे दारू दे दारू बड़े दिनो के बाद मिली है ये दारू
3. ऐना वेना डोप शॉप मारिया करो
4. चार बोतल वोडका काम मेरा रोज़ का
5. मुन्नी शीला बदनाम जवानी
6. ऐ गनपत दारू ला
7. पार्टी यूँ ही चाले ली
8. बेबी डॉल सोने दी
9. पल्लू के निचे छुपाकर रखा है दिखा दू तो हंगामा हो
10. उनके नशे में चलते रहे
इस तरह के वाहियात गाने पुरे जोर शोर, शान के साथ आर्केस्ट्रा और डीजे पे बज रहे होते है। इनमे मुस्लिम समाज के नौ जवान, अधेड़ मर्द औरत युवतिया स्टेज से लगाकर सड़को तक फुदकती थिरकती नजर आ जाएगी।
नाचने के लिए घर की औरते भी कम पड़ जाती है फिर किन्नर और नचोरी लड़किया बुलाई जाती हे। उनके मुह में मुह डाल कर परिवार के सभी सदस्य डांस करते है। शराब जुआ सिगरेट का इन्तेजाम भी बखूबी होता है। बेशर्मी का ऐसा नंगा नाच शायद किसी भी समाज में नही होता होगा। अभी हाल के दिनों में दुल्हे को शराब के घूंट पीकर निकाह कबूल करते देखा गया है। क्यों ना सारे अरमान पुरे किये जाए, आखिर शादी क्या बार बार होती है।
ये है मुसलमानों का खुशिया मनाने का स्टाइल।
इसी स्टाइल से प्रभावित आपको तीन कहानिया सुनाता हूँ
1. एक निकाह बड़े धूम धाम से संपन्न हुआ। जिस लड़की का निकाह हुआ उस लड़की के दो भाई और पिता "बिल्डिग मकान" बनाने के काम में मजदूरी और छोटी मोटी ठेकेदारी किया करते थे… तीनो भाई बहन केवल प्राथमिक शिक्षा प्राप्त थे मगर घर में मौलवी की ड्यूटी लगवाकर उनके माँ बाप ने उन्हें अरबी का कुरआन पढवाया था। खैर मेहनत मजदूरी खून पसीने की कमाई जोड़ जोड़ कर बड़े ही धूमधाम से निकाह कर दिया गया। धूमधाम का मतलब आप समझ गये ना??? धूमधाम का मतलब होता हे जो ऊपर मुसलमानो का खुशिया मनाने का स्टाइल बयान किया गया। धूमधाम मतलब फुल बेहयाई… सब कुछ भूल जाओ। होश में ना रहो। वो होता हे "धूमधाम"... शादी के 7 दिन तक मिंया बीवी में मधुर सबंध रहे मगर आठवे दिन ऐसी कड़वाहट पैदा हुई जिसने आगे चलकर तलाक का रूप लिया।
हुआ यूँ की एक हफ्ते बाद लड़की वालो की तरफ से शादी की वीडियो आई। वीडियो की सीडी लड़का अपने दुकान ले गया ताकि सभी स्टाफ दोस्तों को दिखा सके। वीडियो में उसने कुछ सीन देखे जिससे उसकी दोस्तों के बीच बहुत बदनामी हुई। वीडियो में लड़की एक बेहूदा गाने पे नाच रही थी। इतना ही नही कई मर्दों के साथ उसके ठुमके थे। किन्नरों और नाचने वाली लड़कियों के साथ भी वो नाचने से ना चुकी… लड़का थोड़ा अलग मिजाज़ का था, ये बात उसे हजम नही हुई की उसकी बीवी ऐसे मर्दों के साथ स्टेज पे नाच रही हे। आगे चलकर 3 महीने में ही तलाक हो गया…
2. एक परिवार ने क़र्ज़ लेकर इकलोते लड़के का "धूमधाम" वाला ब्याह कराया… जो डांसर लड़के नाचने के लिए बुलाए थे उनमे से एक डांसर ने जिस लड़के की शादी थी उसी की बहन को प्रेम प्रसंग में फंसा लिया। वो पहले से शादी शुदा था। पहली बीवी को बड़ी सफाई से लात मार कर इसे भगा ले गया और विवाह कर लिया। वो लड़की भी शिक्षा के नाम पे आठवी कक्षा और अरबी का कुरआन पढ़ी हुई थी मगर गले से नही उतरा था और लड़का बाल काटने का काम करता हे। परिवार अभी तक शादी का क़र्ज़ चूका रहा है।
3. लौहार का काम करने वाले व्यक्ति ने अपनी बड़ी बेटी की निकाह "धूमधाम" से कराई… "धूमधाम" में शर्मो हया का जनाजा तो निकल ही चूका था उसी दरमियान कॉलोनी में रहने वाले एक जुन्वारी सटोरी से दुल्हन की छोटी बहन की आंखे लड़ गई। ये सब धूमधाम के नशे में हूआ। दोनों प्रेमियों ने भाग कर आर्य समाज में शादी करली… उनके विवाह प्रमाण पत्र की कॉपी मेरे पास मौजूद हे। दोनों अभी गुजरात में हे। और लुहार के परिवार को रूढ़ीवाद के चलते बिरदारी के बाहर कर दिया गया है।
ऐसी हजारो कहानिया हम सब के इर्द गिर्द घुमती रहती हे जिसे हम आँख मूंदकर नजर अंदाज़ कर जाते है। ""हर गुनाह के पीछे असली गुनाहगार कौन हे ये कोई नही जानता"" ठीक यही स्थति मुस्लिम समाज की है। बेटी के गैर कौम में विवाह करने पे परिवार को बिरदारी से बाहर तो कर दिया गया मगर लड़की के बहकने के असली कारण को नजरअंदाज़ किया गया। असली कारण वो फ़िज़ूल का इतराना था जिसे उस बिरदारी ने बैन नही किया। धूमधाम से बेहयाई अभी भी जारी है।
मुझे समझ नही आता ये कौम किस बात पे इतना इतराती हे? किस बात की ख़ुशी ने इनके होश उड़ा दिए की इन्हें अदब और बेअदबी के दरमियान का फर्क मालूम ना हुआ। मुस्लिम मुआशरे के लिए ये खुशियों में झुमने का नही बल्कि संजीदगी से सोचने का वक्त है।
मुसलमानो को किस बात की खुमारी हे, 6 से 14 वर्ष के 25% मुस्लिम बच्चे स्कुल की शक्ल नही देख पाते??
शादियों में लाखो रुपए फ़िज़ूल(हराम) उड़ाने वाली इस बेशऊर कौम की 35% आबादी गरीबी रेखा से निचे हे। गरीबी रेखा से निचे उसे माना गया गया जिसकी मासिक आय 816 रु. से कम हो। क्यों पागल हुए जा रहे हो??
एक शादी में अपनी हेसियत से बाहर निकल कर 20 हजार से 2 लाख तक का मुजरा सरेराह हो जाता है। ऐसी हजारो शादिया हर साल होती हे जिसमे करोड़ो रुपया हराम में बहाया जाता हे। मुस्लिम समाज दिन बा दिन गर्त में जाता चला जा रहा है।
इन सभी खुराफातो के बीच उलझे कौम के चंद फ़िक्रमंद अफराद बेबसी से अपने ओलमाओ की तरफ देख रहे है। सोच रहे हे की ओलमा आपसी फिरको से बाहर निकलकर इस बेहयाई के खिलाफ कोई फतवा जारी करेंगे या कोई कठोर फेसला लेंगे। मगर ऐसा कुछ होता नजर नही आ रहा। उन्हें फिरको के मकड़जाल से बाहर निकलने की फुर्सत नही मिल रही। ये मौलवी खुद ऐसे निकाह पढवाकर आते है। मुबारक बाद भी देकर आते हे और निकाह पढवाने के एवज में हदिये की रकम भी लेकर आते है।
ऐसा निकाह जिसमे नबी की सुन्नत को बेहरमी से रौंदा जाए वो निकाह नही बल्कि रंगरैली है। इस्लाम ने सादगी का जीवन जीने की शिक्षा दी है। जो इन्सान सादगी में है वही इस्लाम में है।
मैं अपने ओलमाओ से गुजारिश करता हूँ की सुन्नत के नाम पे हो रही इस बेहयाई के खिलाफ कठोर फैसला लेवे। ऐसी निकाह ही ना पढवाई जाए जिसमे नाच गाना फ़िज़ूल खर्ची हो। सोचिये अगर तमाम मौलवी मुफ़्ती ऐसे निकाह पढवाना बंद कर दे तो क्या ऐसे मदहोश लोगो को होश नही आएगा????
अधिकतर लोग इस लेख से मुह छुपाकर निकलने की कोशिश करेंगे क्योकि वो भी इस बेहयाई को अंजाम दे चुके है। उनसे कहना चाहूँगा की जो हो चूका उसके लिए तौबा कीजिये और मुस्लिम मुआशरे की भलाई के लिए इस विचार को अपनी फ़िक्र में शामिल कीजिये।
मेहरबानी करके अपने विचार जरुर रखे ||
Uzer Mansuri की अनमोल कलम से
मुसलमानो की शादी पूरा पढ़ लो शर्मिंदा हो जाओगे हम हैं क्या कर रहें
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